आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) के उन्नत एआई मॉडल माइथोस (Mythos) ने परीक्षण के दौरान अमेरिका के बेहद संवेदनशील और गोपनीय कंप्यूटर सिस्टम में कई सुरक्षा खामियां कुछ ही घंटों में खोज निकाला। इस खुलासे के बाद AI की राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर और सरकारी नियंत्रण को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बड़ा दावा किया है। उनके मुताबिक, AI कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) का शक्तिशाली मॉडल माइथोस (Mythos) अमेरिकी सरकार के बेहद गोपनीय और सुरक्षित कंप्यूटर सिस्टम में मौजूद कई कमजोरियों को कुछ ही घंटों में पहचानने में कामयाब रहा। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, यह टेस्ट एंथ्रोपिक और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने मिलकर किया था। अधिकारी ने बताया कि AI मॉडल ने बहुत कम समय में सिस्टम की सुरक्षा खामियां ढूंढ लीं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि AI ने उन सिस्टम्स को हैक भी कर लिया था।
प्रोजेक्ट ग्लासविंग के तहत हुआ टेस्ट
यह परीक्षण एंथ्रोपिक के प्रोजेक्ट ग्लासविंग (Project Glasswing) नाम के कार्यक्रम के तहत किया गया। इसका मकसद यह समझना है कि भविष्य के शक्तिशाली AI मॉडल दुनिया के महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर और डिजिटल सिस्टम के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकते हैं। कंपनी का मानना है कि ऐसे AI मॉडल सार्वजनिक सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकते हैं। इसलिए उनकी क्षमताओं का पहले से परीक्षण जरूरी है।
नतीजे हैरान करने वाले थे। माइथोस ने चंद घंटों में ही संवेदनशील सिस्टम्स की कमजोरियों को उजागर कर दिया। हालांकि, अधिकारी ने यह स्पष्ट किया कि खामियां ढूंढने का मतलब यह नहीं है कि एआई ने उसी समय उन कमजोरियों का फायदा उठाकर सिस्टम को नुकसान पहुंचाया।
अमेरिकी सीनेटर ने भी किया जिक्र
इस चौंकाने वाली घटना की गूंज अमेरिकी संसद तक पहुंच चुकी है। 11 जून को सीनेट की बैंकिंग, हाउसिंग और शहरी मामलों की समिति की सुनवाई के दौरान, वर्जीनिया के डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क वार्नर ने इस टेस्टिंग का जिक्र किया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “इस टूल ने हमारे लगभग सभी गोपनीय सिस्टम्स को हफ्तों में नहीं, बल्कि सिर्फ घंटों में भेद दिया।” सीनेटर वार्नर ने यह जानकारी नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी (NSA) और यूएस साइबर कमांड के प्रमुख जनरल जोशुआ रुड के हवाले से दी। हालांकि, जब इस गंभीर मुद्दे पर एनएसए और एंथ्रोपिक, तो दोनों ने ही टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।
ट्रंप प्रशासन और एंथ्रोपिक के बीच बढ़ती तनातनी
भले ही एंथ्रोपिक और अमेरिकी एजेंसियों ने मिलकर यह परीक्षण किया हो, लेकिन इस कैलिफोर्नियाई कंपनी और ट्रंप प्रशासन के बीच रिश्ते तल्ख होते जा रहे हैं। एक तरफ एंथ्रोपिक इस बात को लेकर चिंतित है कि अमेरिकी सेना उनके एआई का इस्तेमाल किस तरह करेगी, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने कंपनी के कुछ मॉडल्स पर कड़ी पाबंदियां लगा दी हैं।
इस महीने की शुरुआत में, प्रशासन ने एक निर्देश जारी कर एंथ्रोपिक को अपने सबसे नए एआई मॉडल्स, फेबल 5 (Fable 5) और माइथोस 5 (Mythos 5) के इस्तेमाल से विदेशी नागरिकों को रोकने का आदेश दिया था। आपको बता दें कि एंथ्रोपिक ने ‘फेबल’ को तो आम जनता के लिए रिलीज कर दिया था, जो कि माइथोस का एक सीमित संस्करण है, लेकिन साइबर सुरक्षा के डर से ‘माइथोस’ तक पहुंच को बेहद कड़ा रखा गया है।
क्या है सरकार का नया फरमान?
यह कड़ा निर्देश राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा साइन किए गए एक कार्यकारी आदेश के ठीक 10 दिन बाद आया। इस आदेश के तहत एक नया ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें सबसे उन्नत एआई सिस्टम्स को जनता के बीच उतारने से पहले संघीय सरकार उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों की जांच करेगी। हालांकि, यह आदेश एआई डेवलपर्स के लिए स्वैच्छिक है।
सरकारी फरमान के आगे झुकते हुए, एंथ्रोपिक ने प्रशासन के निर्देशों का पालन करने के लिए अपने सभी ग्राहकों के लिए इन मॉडल्स को बंद कर दिया है। लेकिन कंपनी ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्ट किया है कि सुरक्षा चिंताओं को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम पूरी तरह से गैर-जरूरी थे।
[: साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने खोला मोर्चा
सरकार के इस रवैये से साइबर जगत भी खफा है। एडोब (Adobe) और एनवीडिया (Nvidia) जैसी दिग्गज कंपनियों के 100 से अधिक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और लीडर्स ने ट्रंप प्रशासन को पत्र लिखकर इस निर्देश को वापस लेने की मांग की है।
उनका तर्क है कि माइथोस जैसे मॉडल्स सॉफ्टवेयर की खामियां ढूंढने और उनका इस्तेमाल करने में बेहतरीन जरूर हैं, लेकिन बाजार में ऐसे और भी मॉडल्स मौजूद हैं जिनका वे नियमित रूप से सुरक्षा ऑडिट के लिए इस्तेमाल करते हैं। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि ऐसे समय में जब अमेरिका के दुश्मन तकनीकी रूप से तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, बिना किसी ठोस कारण के देश की सबसे बेहतरीन साइबर रक्षा क्षमताओं (AI Models) को छीन लेना अमेरिका के लिए ही आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।




